Hyderabad ISIS Terror Module; Doctor Mohiyuddin | Delhi Blast | RSS ऑफिस, मंदिर और मार्केट पर केमिकल-अटैक की साजिश: मास्टरमाइंड डॉक्टर मोइनुद्दीन ने चीन में ‘रिसिन’ बनाना सीखा, बोला- बेचकर करोड़पति बनूंगा


‘मैं ऐसी दवा बना रहा हूं, जिससे पूरा घर अमीर हो जाएगा।’

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हैदराबाद के राजेंद्रनगर में रहने वाले डॉ. अहमद सैयद मोइनुद्दीन ने ये बात अपने भाई उमर फारूकी से कही थी। 13 नवंबर को गुजरात ATS ने मोइनुद्दीन के घर छापा मारा, तो पता चला अमीर बनाने वाली वो दवा खतरनाक केमिकल रिसिन है, जिसे आतंकी संगठन ISIS लोगों को मारने के लिए इस्तेमाल करता है।

ATS के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, मोइनुद्दीन ISIS के टेरर मॉड्यूल का हिस्सा है और देश में बड़े केमिकल अटैक की तैयारी कर रहा था। इसके लिए रिसिन नाम का केमिकल बना रहा था, जो अरंडी के बीज से निकलता है।

ATS ने 8 नवंबर को गुजरात के बनासकांठा से मोइनुद्दीन के साथ यूपी के शामली में रहने वाले आजाद सुलेमान शेख और लखीमपुर खीरी के मोहम्मद सुहैल सलीम खान को पकड़ा था। दोनों की उम्र सिर्फ 20 और 23 साल है। मोइनुद्दीन ने चीन से मेडिकल की पढ़ाई की है। वो केमिकल एक्सपर्ट है।

ATS के मुताबिक, आजाद सुलेमान और सुहैल बीते 7 महीनों में लखनऊ में RSS मुख्यालय, अहमदाबाद की नरोदा फल मंडी, दिल्ली की आजादपुर मंडी और हरिद्वार के मंदिरों की रेकी कर चुके थे। दोनों के पाकिस्तान में कॉन्टैक्ट मिले हैं। वे राजस्थान में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास ड्रोन से गिराए गए हथियार और पैसे जुटाकर मोइनुद्दीन तक पहुंचाते थे।

रिसिन से अटैक के दुनिया में 40 मामले, भारत में पहली बार खुलासा ATS को 7 नवंबर का CCTV फुटेज मिला था, जिसमें डॉ. मोइनुद्दीन आजाद सुलेमान और मोहम्मद सुहैल के साथ अहमदाबाद के होटल ग्रैंड एम्बियंस से बाहर निकलता दिखा था। इसी फुटेज के आधार पर तीनों का कनेक्शन पता चला।

टेरर मॉड्यूल का मास्टरमाइंड मोइनुद्दीन है। बताया जा रहा है कि वो अहमदाबाद हथियार लेने गया था, वहीं ATS ने उसे गिरफ्तार कर लिया। तेलंगाना की साइबराबाद पुलिस और गुजरात ATS को हैदराबाद में मोइनुद्दीन के फ्लैट से बक्सों में स्टोर किया मटेरियल मिला, जिससे रिसिन केमिकल बनाया जाना था।

दुनिया भर में रिसिन का इस्तेमाल 1978 से लेकर 2025 तक 40 बड़ी साजिशों में हो चुका है। भारत में अब तक इसका कोई केस नहीं आया था। ये पहली बार है, जब इसे पकड़ा गया है। इस केमिकल वेपन का इस्तेमाल इस्लामिक स्टेट से जुड़े संगठन करते आए हैं। लिहाजा, सुरक्षा एजेंसियां ISIS से जुड़े ISKP और ISHP मॉड्यूल की भी जांच कर रही हैं।

अब तीनों संदिग्ध आतंकियों के बारे में जान लीजिए

डॉ. अहमद सैयद मोइनुद्दीन जनरल फिजिशियन है। वो हैदराबाद के राजेंद्रनगर में फोर्ट व्यू कॉलोनी के असद मंजिल अपार्टमेंट में रहता था। मोइनुद्दीन ने चीन से MBBS की पढ़ाई की थी। वो किसी हॉस्पिटल या क्लिनिक से नहीं जुड़ा है और मरीजों को इंटरनेट पर फ्री हेल्थ एडवाइस देता था।

डॉ. मोइनुद्दीन हैदराबाद के इसी अपार्टमेंट में अकेला रहता था। उसका निकाह नहीं हुआ है।

डॉ. मोइनुद्दीन हैदराबाद के इसी अपार्टमेंट में अकेला रहता था। उसका निकाह नहीं हुआ है।

गुजरात ATS के सोर्स बताते हैं, ‘मोइनुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि वो संदिग्ध आतंकी गिरोह का हिस्सा है और घातक बायो-केमिकल सब्सटेंस का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर केमिकल अटैक करने की फिराक में था। उसे अफगानिस्तान में रह रहे अबू खलेजा से निर्देश मिल रहे थे, जो आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस से जुड़ा है।’

‘ATS को मोइनुद्दीन और उसके हैंडलर की सोशल मीडिया पर की गई चैट और ChatGPT पर खतरनाक केमिकल बनाने के तरीके सर्च करने से जुड़े सबूत मिले हैं।’

मोइनुद्दीन के फ्लैट से 3 लीटर कैस्टर ऑयल (अरंडी का तेल), 5 लीटर एसीटोन और तेल निकालने वाली कोल्ड प्रेस मशीन मिली है। मोइनुद्दीन ने फ्लैट में ही लैब बना रखी थी।

मोइनुद्दीन के फ्लैट से 3 लीटर कैस्टर ऑयल (अरंडी का तेल), 5 लीटर एसीटोन और तेल निकालने वाली कोल्ड प्रेस मशीन मिली है। मोइनुद्दीन ने फ्लैट में ही लैब बना रखी थी।

जांच एजेंसी के मुताबिक, मोइनुद्दीन 2007 में MBBS करने चीन गया। 2012–13 में भारत लौटा और कुछ समय परिवार के साथ तेलंगाना के खम्मम में रहा। इसके बाद राजेंद्रनगर में रहने लगा। उसकी आखिरी लोकेशन अहमदाबाद में मिली थी। मोइनुद्दीन के भाई उमर फारूकी से उसके गुजरात जाने के बारे में पूछा गया, तो उसने बताया कि वो बिजनेस के सिलसिले में गया था।

ATS के मुताबिक, मॉड्यूल में शामिल मोहम्मद सुहैल और आजाद सुलेमान ने मोइनुद्दीन को हथियारों से भरा बैग पहुंचाया था। एक पार्सल में डेढ़ लाख रुपए भी थे, जो पाकिस्तानी एजेंट के कहने पर भेजे गए थे। मोइनुद्दीन के भाई फारूकी ने पुलिस को बताया कि फ्लैट पर आने वाले पार्सल के बारे में पूछने पर मोइनुद्दीन कहता था कि वो ऐसी दवा बना रहा हैं, जिससे पूरा घर अमीर हो जाएगा।

सुरक्षा एजेंसी से जुड़े सोर्स बताते हैं, ‘मॉड्यूल में शामिल आजाद सुलेमान शेख टेरर अटैक के मकसद से जम्मू-कश्मीर के बारामूला गया था। वहां उसे कोई टारगेट नहीं मिला, तो वो दिल्ली लौट आया। दिल्ली में रहते हुए उसने हरिद्वार जाकर बड़े मंदिरों की रेकी की थी। वहीं, सुहैल के घर से ISIS का लिटरेचर और झंडे मिले हैं।

गुजरात ATS के DIG सुनील जोशी कहते हैं, ‘8 नवंबर को ATS के SP के. सिद्धार्थ की टीम ने अहमदाबाद-मेहसाणा हाईवे पर अडालज टोल प्लाजा के पास से डॉ. मोइनुद्दीन को गिरफ्तार किया था। इसके बाद रिसिन अटैक की साजिश का खुलासा हुआ। इनके पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से लिंक मिले हैं।’

मोइनुद्दीन की कार से दो ग्लॉक पिस्टल, एक बेरेटा हैंडगन, 30 गोलियां और 10 लीटर के कंटेनर में रखा लगभग 4 लीटर कैस्टर ऑयल मिला। डॉ. मोइनुद्दीन को ये हथियार आजाद सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहैल ने पहुंचाए थे।

मोइनुद्दीन की कार से दो ग्लॉक पिस्टल, एक बेरेटा हैंडगन, 30 गोलियां और 10 लीटर के कंटेनर में रखा लगभग 4 लीटर कैस्टर ऑयल मिला। डॉ. मोइनुद्दीन को ये हथियार आजाद सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहैल ने पहुंचाए थे।

‘तीनों ने बताया कि वे कैस्टर ऑयल के जरिए रिसिन नाम का टॉक्सिन बना रहे थे। उन्होंने हमले का तरीका तय नहीं किया था। रिसिन तैयार हो जाता, तब हमले का प्लान बनाते। ATS अब इस मॉड्यूल के दूसरे सदस्यों को तलाश रही है। उसकी टीमें अब उन सभी जगहों पर जाएंगी, जहां मोइनुद्दीन, सुहैल और आजाद मिले थे। कुछ अधिकारियों को सबूत जुटाने के लिए लखीमपुर खीरी और शामली भी भेजा गया है।’

जानलेवा रिसिन का कोई इलाज नहीं, हमलों में इस्तेमाल की हिस्ट्री रिसिन की खोज 1888 में जर्मन वैज्ञानिक पीटर हर्मन स्टिलमार्क ने की थी। पहले विश्व युद्ध में जर्मनी की सेना ने इसे हथियार के तौर पर आजमाया। इसे साइनाइड से भी ज्यादा घातक माना जाता है। आखिर ये कितना खतरनाक है, ये जानने के लिए हमने लखनऊ के केमिकल एक्सपर्ट आनंद अस्थाना से बात की।

आनंद बताते हैं कि रिसिन एक तरह से पोटेंट टॉक्सिन यानी बहुत खतरनाक जहर है। इसे अरंडी के छोटे बीजों को रिफाइन करके तैयार किया जाता है। ये सफेद पाउडर होता है। इसे जितना ज्यादा महीन किया जाएगा, उतना ही खतरनाक बन जाता है।

ये दो तरीके से तबाही मचा सकता है। पहला: अगर इलाके में डस्ट (महीन धूल) है और रिसिन के पाउडर को वहां फैला दिया जाए, तो ये उस एरिया में रहने वाली बड़ी आबादी पर असर कर सकता है। इसका असर तुरंत नहीं, लेकिन दो-तीन दिन में दिखने लगता है। केमिकल रिएक्शन होने से जान जा सकती है।

दूसरा: रिसिन को पानी में मिलाकर या सिरिंज के जरिए इंजेक्ट करके घातक बनाया जा सकता है। ये पानी में आसानी से घुल सकता है। इंजेक्शन के जरिए तुरंत खून के संपर्क में आ जाता है। अगर इसे पानी के जरिए इनटेक किया गया है, तो कुछ घंटों बाद इसका असर दिखना शुरू हो जाता है।

वहीं, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में बॉटनी डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर आरएन खरवार कहते हैं, ‘रिसिन की टॉक्सिसिटी साइनाइड से भी ज्यादा होती है। डॉ. मोइनुद्दीन के पास 3 किलो कैस्टर पल्प मिला है। अगर ये शुद्ध कैस्टर पल्प है, तो इससे 100 ग्राम से ज्यादा रिसिन बनाया जा सकता था। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इतनी मात्रा में रिसिन का मिलना कितनी बड़ी आबादी को प्रभावित कर सकता था।’

अमेरिका, भारत और UN ने बैन लगाया मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस की रिपोर्ट के मुताबिक, US सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने रिसिन को कैटेगरी B बायोटेररिज्म एजेंट के तौर पर क्लासिफाई किया है।

यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन यानी UNSCR ने इस केमिकल पर बैन लगाया हुआ है। भारत के वेपंस ऑफ मॉस डिस्ट्रक्शन एक्ट-2005 में भी ऐसे किसी बॉयोटॉक्सिन के प्रोडक्शन या इसे जमा करने पर बैन लगाया गया है। इसके बावजूद रिसिन आसानी से मिल जाता है। इसे प्रोसेस करना भी आसान है।

मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस की रिपोर्ट के मुताबिक, रिसिन टॉक्सिन का इस्तेमाल शीत युद्ध यानी कोल्ड वॉर में हुआ था। इसके अलावा अल-कायदा और ISIS जैसे आतंकी संगठन इसका इस्तेमाल करते आए हैं। हालांकि अब तक कोई भी आतंकवादी संगठन हथियार में इस्तेमाल होने लायक रिसिन बनाने में कामयाब नहीं हुआ है।

पत्रकार की हत्या, ओबामा को भेजे रिसिन वाले लेटर रिसिन का पहला केस कोल्ड वॉर के दौरान 1978 में आया था। इसे रूस की खुफिया एजेंसी KGB ने अंजाम दिया था। रिसिन का इस्तेमाल एक मॉडिफाइड छाते में किया गया था। इसके जरिए बुल्गारिया के पत्रकार जॉर्जी मार्कोव की लंदन में हत्या कर दी गई थी।

उसी साल पेरिस में भी एक हत्या में रिसिन का इस्तेमाल हुआ था। 1980 के दशक में इराक के बायोलॉजिकल वेपन प्रोग्राम में रिसन टॉक्सिन मिलने का दावा किया गया था।

2013 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और कुछ अधिकारियों को रिसिन वाले लेटर भेजे गए थे। हालांकि इससे कोई नुकसान नहीं हुआ था। 2018 में ISIS ने ट्यूनिशिया में इसे इस्तेमाल किया था। 2025 में जर्मनी में होम लैब में रिसिन बनाने की जानकारी मिली है।

मिसिसिपी के रहने वाले जे. एवरेट डुटश्के ने बराक ओबामा को रिसिन वाले लेटर भेजने की बात कबूली थी। उसे 25 साल की सजा सुनाई गई।

मिसिसिपी के रहने वाले जे. एवरेट डुटश्के ने बराक ओबामा को रिसिन वाले लेटर भेजने की बात कबूली थी। उसे 25 साल की सजा सुनाई गई।

अब तक की जांच में दावा है कि हैदराबाद में गिरफ्तारी से पहले भारत में रिसिन से जुड़ी आतंकी साजिश का कोई केस नहीं आया है। आतंकी मॉड्यूल की जांच से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि इस्लामिक स्टेट से जुड़े ग्रुप जैसे ISKP और उसकी भारतीय सब-यूनिट इस्लामिक स्टेट-हिंद प्रोविंस काफी समय से ऐसे केमिकल या बायोलॉजिकल टेरर अटैक की फिराक में हैं। इसलिए ये केस काफी अहम हो गया है।

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